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जातिगत भेदभाव का आतंक फिर : ओडिशा में लड़का अपनी मृत मां को साइकिल पर ले जाता है, क्योकि पड़ोसी ने मदद करने से इनकार किया !!

जाति का आतंक: ओडिशा का लड़का मृत मां को साइकिल पर ले जाता है, जब पड़ोसी मदद करने से इनकार करते हैं
यहाँ ओडिशा के एक गाँव में जहा एक लड़के को अपनी माँ के मरने के बाद क्या सहना पड़ा

जब उनसे पूछा गया कि शरीर किसका है, तो वह शांत स्वर में बोले।

“मेरी माँ।”

जैसा कि युवा सरोज ने अपनी मां के शरीर को ढहते हुए ले जाने वाली साइकिलको धक्का दिया, उसके मंन्न में पता नहीं कैसे कैसे विचार आरहे होंगे एक तरफ तो अपनी माँ की मर्त शव था दूसरी तरफ लोगो के विचारों से विचलित होना, लेकिन फिर भी उस लड़के ने धीरे धीरे अपने कदम बढ़ाये !

सिर से पाँव तक ढँकी हुई, जानकी सिंहानिया की लाश को देखने लोग इखट्टा तो हुए लेकिन किसी ने भी उसकी मदद करने के लिए अपना हाथ नहीं दिया@

जब उसका अंतिम संस्कार करने का समय आया, तो ओडिशा के एक गाँव कर्पबाहल में उसका एक भी पड़ोसी नहीं था! न ही उसके शव को लेजाने में मदद ki

उनका कारण: वह एक नीची जाति का था।

इसलिए 17 साल की सरोज ने शव को चार से पांच किलोमीटर तक साइकिल पर चलाया।

उसके बारे में कहा जाता है कि उसने अपनी मां को एक जंगल में दफनाया था।

जानकी सिंहानिया, जो 45 वर्ष की थीं, जब वह पानी लाने गईं और जमीन पर गिर गईं। इसलिए उनकी मर्त्यु हो गयी थी!

उसका पति – सुंदरगढ़ जिले का एक आदमी जिसकी उसने दस साल पहले शादी की थी – भी मर चुका है। वह अपनी मृत्यु के बाद अपने बेटे और बेटी के साथ अपने पैतृक गांव में रही।

जानकी सिंहानिया की अंतिम यात्रा के दौरान, सरोज उसके पास खड़े हुए थे

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