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असम के बोगीबील में भारत के सबसे लंबे रेलमार्ग पुल का लोकार्पण आज PM ने किया!

BOGIBEEL: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम में बोगीबिल रेलमार्ग पुल का उद्धघाटन किया , जिसे भारत के सबसे लंबे रेल पुल के रूप में गिना जायेगा। इसकी नींव 1997 में रखी गई थी। ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस पुल को देखकर लोग आश्चर्य में है । बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ और धेमाजी जिलों को जोड़ेगा, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे होंगे। यह यात्रा के समय में चार घंटे की कटौती करेगा और 170 किलोमीटर लम्बे चक्कर को कम करेगा। चीन की सीमा से निकटता के साथ, पुल का भारत की रक्षा के लिए भी काफी महत्व है और इसे इतना मजबूत बनाया गया है कि इसपर टैंकों और यहां तक ​​कि लड़ाकू जेट की लैंडिंग भी कर सकते है।

कुछ महत्वपूर्ण बाते

1. यह पुल इस तरह बनाया गया है जैसे की स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाला पुल है , बोगीबील पुल भारत का एकमात्र पूर्ण-वेल्डेड पुल है जिसके लिए यूरोपीय कोड और वेल्डिंग मानकों का पालन करता है ।इंजीनियरों का कहना है की एक पूरी तरह से वेल्डेड पुल की कम रखरखाव लागत लगती है !

Daily News Epaper Updated : 25/12/2018

Time — 4.05 PM

2. अधिकारियों ने कहा कि पुल, जो एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल-एंड-रोड कनेक्टर भी है, की उम्र लगभग 120 साल है।

3. पुल में निचले डेक पर दो-लाइन रेलवे ट्रैक और शीर्ष डेक पर तीन-लेन सड़क है। यह दिल्ली से डिब्रूगढ़ ट्रेन यात्रा के समय को लगभग तीन घंटे कम कर देगा।

4. पीएम मोदी जल्द ही एक ट्रेन – तिनसुकिया-नाहरलागुन इंटरसिटी एक्सप्रेस को भी हरी झंडी देने वाले है , जो सप्ताह में पांच दिन चलेगी।

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5. इस पुल से असम के डिब्रूगढ़ और धेमाजी जिलों के अलावा अंजाव, चंगलांग, लोहित, लोअर दिबांग वैली, दिबांग वैली और अरुणाचल प्रदेश के तिरप के सुदूर जिलों के निवासियों के लिए बड़े पैमाने पर मदद मिलेगी।

6. बोगीबिल ब्रिज अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के साथ रक्षा आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की संभावना है। बताया जारहा है कि पुल की तीन सड़क गलियां वायु सेना के लिए तीन लैंडिंग स्ट्रिप्स के रूप में कार्य कर सकती हैं।

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